मुंबई, रिपोर्ट स्पर्श देसाई,
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नई ज्वैलरी के रूप में निवेश करने के लिए पुरानी ज्वैलरी को बेचा जाता है तो
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 54 एफ के अनुसार कैपिटल गेन से छूट को रत्न एवं आभूषण उद्योग तक बढ़ाया जाना चाहिए। करेगा, पुरानी ज्वैलरी या पुराने सोने से नए आभूषणों के रीमेक करने के मामले में, 18 फीसदी जीएसटी शुल्क लागू है। जीएसटी की उच्च दर के कारण, ग्राहक इस विकल्प को आजमाने के लिए अनिच्छुक हो जाता हैं। ऐसे में ग्राहक के पास पुरानी ज्वैलरी को बेचना और नई ज्वैलरी खरीदने का दूसरा विकल्प ही रह जाता है। हालांकि, जब तक कैपिटल गेन्स टैक्स शामिल है, ग्राहक इस विकल्प के लिए संकोच में रहेंगे। ऐसा अपनी बात में राकेश कुमार, इंडिया ज्वेलर्स फोरम ने बताया था ।
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