*भारतीय हीरा उद्योग पर टैरिफ का गहरा असर,मांग में भारी गिरावट,लाखों कर्मचारियों ने छोड़ा काम*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*भारतीय हीरा उद्योग पर टैरिफ का गहरा असर,मांग में भारी गिरावट,लाखों कर्मचारियों ने छोड़ा काम*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई


【मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए आयात शुल्क (टैरिफ) के कारण भारत का हीरा उद्योग गंभीर संकट में फंस गया है। इसकी वजह से हीरों की मांग आधे से अधिक गिर गई है। जिसके चलते सूरत और मुंबई जैसे प्रमुख केंद्रों में लगभग 1 लाख कर्मचारियों ने इस उद्योग को छोड़ दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्णय के अनुसार भारत से आयात होने वाले हीरों पर शुल्क 50% तक बढ़ा दिया गया है । जो 27 अगस्त 2025 से लागू होगा। इसके कारण भारत से अमेरिका को होने वाले हीरा निर्यात में भारी गिरावट आने की आशंका है। पिछले वर्षों (2022-2024) में इस क्षेत्र का औसत वार्षिक निर्यात 2968.48 मिलियन डॉलर था । जो इस साल घटकर लगभग 1494.11 मिलियन डॉलर रह सकता है। पहले इन उत्पादों पर 0% से 13.5% तक ही शुल्क लगता था लेकिन अगस्त की शुरुआत में इसे पहले 25% और अब 50% कर दिया गया है। इससे उद्योग में मंदी आ गई है । जिसके कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है और नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है। अनुमान है कि अगले छह महीनों में लगभग 1.25 लाख कर्मचारियों की नौकरियां जा सकती हैं। जिनमें अधिकांश सूरत और मुंबई के हीरा काटने और आभूषण निर्माण से जुड़े श्रमिक हैं। उद्योग जगत को उम्मीद है कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाला द्विपक्षीय व्यापार समझौता इस समस्या का समाधान कर सकता है। इसकी चर्चा अक्टूबर- नवंबर तक पूरी होने की संभावना है। इस बीच उद्योग नेताओं ने सरकार से विशेष आर्थिक क्षेत्रों में सुधार,अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स को बढ़ावा और ब्रिक्स जैसे देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर तेजी से काम करने की मांग की है।

इसके अलावा ट्रंप के इस फैसले को भारत की ऊर्जा संप्रभुता और किसानों के हितों पर हमला बताया जा रहा है। भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के मुद्दे को लेकर अमेरिका का यह कदम द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है। उद्योग संगठनों ने सरकार से कई सुझाव दिए हैं। जिनमें शामिल हैं । वस्त्र उद्योग के लिए ब्याज सब्सिडी और निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं का विस्तार। आभूषण क्षेत्र को आसान ऋण और नए निर्यात बाजार उपलब्ध कराना।कृषि क्षेत्र में सब्सिडी बढ़ाना और मूल्यवर्धन पर ध्यान देना। एमएसएमई उद्योग को तकनीकी उन्नयन और वित्तीय सहायता प्रदान करना साथ ही "वोकल फॉर लोकल"और ''मेक इन इंडिया'' जैसे अभियानों को और तेज करने की जरूरत है। टैरिफ बढ़ने से भारत के कपड़ा और गारमेंट निर्यात पर भी खतरा मंडरा रहा है। जिसका मूल्य लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये है और यह लगभग 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार देता है। भारत के गारमेंट निर्यात का 35% हिस्सा अमेरिका जाता है और यह नया शुल्क भारत को बांग्लादेश,वियेतनाम और चीन जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले पिछड़ सकता है इसलिए उद्योग नेता चाहते हैं कि सरकार टेक्सटाइल और एमएसएमई क्षेत्रों के लिए विशेष राहत पैकेज जारी करे। निर्यात सब्सिडी बढ़ाए और अन्य प्रोत्साहन दे ताकि भारत वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा बनाए रख सके।【Photo Courtesy Google】
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