बढ़ी हुई ड्यूटी और दामों से भारत के सोना-चांदी उधोग में मंदी /रिपोर्ट स्पर्श देसाई

-- मुंबई, भारत के ज्वेलरी बाजार का बुरा हो गया हैं हाल । यह कारोबार पूरी तरह ठप्प हो गया हैं। करीब करीब सभी कारीगर लोग बिना काम से बैठे हैं। ईमानदारी से काम करने वाले व्यवसायी अपना कारोबार बंद करके दूसरे ट्रेड की तलाश में जुटे हैं। केंद्र सरकार ने ड्यूटी 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दी है। उपर से 3 प्रतिशत जीएसटी की भी मार पड़़ी हैं । हालत यह हो गयी है कि सोना एवं चांदी MCX से भी नीचे बिक रहा है। यदि आप इस पर गौर करें तो  लेने की बात करते हैं तो एक किग्रा चांदी पर दो-ढाई हजार रुपये का अंतर दिखाई देता हैं । इसी तरह 10 ग्राम सोने पर भी करीब-करीब इतना ही अंतर देखा जा रहा हैैं। यही वजह हैं कि बाजार में दो नंबर में सोना-चांदी धड़ाधङ बिक रहां हैं ।लेकिन जो रजिस्टर्ड कारोबारी हैं, यह उनके किसी काम का नहीं है। दो नंबर में सोना ले नहीं सकते हैं, और नंबर एक में लेकर ज्वेलरी बनाकर बेचने में उन्हें कोई फायदा नहीं हो रहा। आयात करीब करीब ठप्प हो गई हैं । इस समय सोने-चांदी की आयात एकदम सूस्त है। सवाल उठता है कि तो फिर बाजार में इतना सोना-चादी आ कहां से रहा हैं? तो जवाब में दिल्ली के बुलियन ट्रेडर सुशील चौहान बताते हैं कि उनके पुराने सौदे हैं, जो अब आ रहे हैं। इस सवाल का जवाब कि छोटे- छोटे निवेशकों से उनका माल MCX से भी नीचे के भाव क्यों खरीदा जा रहा हैं ?  तो चांदी के व्यापारी देवेंद्र दौनेरिया कहते हैं कि हम MCX से नीचे खरीद रहे हैं तो सौ-पचास रुपये के अंतराल पर बेच भी रहे हैं। कहने का सीधा मतलब है कि बाजार में MCX के कोई मायने नहीं है। भाव अपने हिसाब से ईजाद कर लिये जाते हैं। एक निवेशक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने काफी पहले 50 किग्रा चांदी खरीदी थी। सोचा था कि बेटी की शादी के समय बेच दूंगा। अब उसे भाव मिल रहा है, उस भाव पर कोई भी दुकानदार लेने को तैयार नहीं है। यह रिपोर्ट जब तैयार हो रही थी तब MCX पर चांदी 41525 रुपये प्रति किग्रा थी और इस पर 800 रुपये प्रीमियम के बाद 42350 का भाव आ रहा था। यदि कोई पायल निर्माता चांदी खरीदना चाहता है तो उसे 42350 रुपये प्रति किग्रा ही लेनी पड़ेगी। जबकि मिलावट करनेवालों को यह चांदी MCX के भाव से 850 रुपये नीचे मिल जाएगी। इस तरह देखा जाए तो एक किग्रा चांदी पर करीब करीब ₹ 1600- 1700 का फर्क देखा जा रहा है। ईमानदारी से काम करके टैक्स भरने वाले जो ज्वेलर्स व्यापारी हैं वो  अपने हाथों से अपने बाल नोंचने पर मजबूर हैं। चौबेजी का फाटक स्थित एक ज्वेलरी शॉप के संचालक ने साफ-साफ कहा कि इस समय एक पैसे का भी काम नहीं रहा है। यदि यही हालात आगे रहे तो वह अपना कारोबार ही बदल देगा। इसी तरह एमजी रोड पर ज्वेलरी शोरूम संचालक भी बेकार बैठे हुए हैं। प्रिंट मीडिया ऐसी नादानी न करे टैबल स्टोरी के चलते ही अमेरिका समेत विदेशों में अखबार बिकना बंद हो गये हैं। अखबार छपते जरूर हैं लेकिन उनका खरीदार कोई नहीं। फ्री में लोगों के दरवाजों के आगे पॉलिथिन में बंद करके डाल दिये जाते हैं। लोग उन्हें उठाकर गारबैज में फेंक देते हैं। भारत में अभी ये हालात तो नहीं हैं, लेकिन स्टोरी छापने का यही तरीका कायम रहा तो आगे आने वाली जनरेशन अखबार पढऩा ही छोड़ देगी। आज सुबह के एक बड़े अखबार ने छापा है कि" सोने के दो भाव, आयकर विभाग लेगा हिसाब। " क्या यह अखबार बताएगा कि आयकर विभाग किससे, किस तरह का हिसाब लेगा? जब मार्केट में कोई डिमांड ही नहीं है और टैक्स भरने वाले व्यापारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, तो ये किस तरह का हिसाब देंगे। उनका टेंशन ये है कि आने वाले फाइनेंशियल ईयर में वह टैक्स की भरपाई कैसे करेंगे। आयकर विभाग को तो ग्रोथ चाहिए, उसी हिसाब से उनके टारगेट निश्चित होते हैं। ज्वेलरी व्यापार पिछले एक महीने से मंदी में जा रहा है। यही नहीं, एक अन्य समाचार पत्र ने छापा है कि "तस्करी के सोने से आयकर के रडार पर आये सर्राफ। "इस खबर को पढऩे से जाहिर होता है कि सर्राफा कारोबारी तस्करी कर रहा हो । अखबार सरकार का ध्यान इस ओर क्यों नहीं इंगित करता कि 15.5 प्रतिशत की ड्यूटी लगने के बाद ग्राहक ज्वेलरी क्योंकर खरीदना चाहेगा ? वह ऐसे दुकानदार की तलाश करेगा, जो उसे सस्ती ज्वेलरी मुहैया कराएगा। जाहिर है कि बेईमान दुकानदारों की चांदी होगी ही लेकिन मरेगा कौन? वही छोटा निवेशक, जिसने आड़े वक्त के लिए सोना जमा कर रखा था। अब बाजार में बेचने आ रहा है तो भाव होने के बावजूद उसे भाव नहीं मिल रहा। अगर संवाददाताओं में जरा भी सक्रियता है तो बाजार में दुकानों पर जाकर उनकी वास्तविक स्थिति का आंकलन करें। कायदे से होना यह चाहिए कि सरकार को तस्करी के माल पर अंकुश के लिए कवायद करनी चाहिए। बड़े पैमाने पर हो रही है सोने में इसमें कोई शक नहीं कि सोने की आयात लगभग बंद है। बैंकों से भी आयाती सोना नाम मात्र का  उतर रहा है। तो फिर बाजार में सोना- चांदी आ कहां से रहा है। यह तथ्य आयकर विभाग और सरकार को संज्ञान में लेना चाहिए न कि ईमानदारी से काम करने वाले व्यापारियों पर शक करने के उनको परेशान करना चाहिए। अभी 25 दिन पहले मैंने अमरीका के शिकागो की एमजी रोड स्थित इंडियन मार्केट में सोने का भाव पूछा था। उस समय MCX पर 1410 डालर प्रति औंस था लेकिन दुकानदार ने प्रीमियम लगाकर 1460 डालर का भाव बताया। दूसरी दुकान पर गया तो उसने 1450 डालर प्रति औंस का भाव बताया। विरोधाभास तो देखिये जहां से सोना आयात हो रहा है, वहां तो MCX के भाव पर प्रीमियम लिया जा रहा है, लेकिन यहां भारत में MCX से 800 रुपये नीचे भाव चल रहा है। अगर आप सोने का आयात करके बेच रहे हैं तो जाहिर है कि आप भी MCX पर प्रीमियम लेंगे ही लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है तो जाहिर है कि सोना तस्करी का है। अब ड्यूटी कम करने के लिए ज्वेलर्सो को आंदोलन की शुरुआत करने के लिए तैयार होना पडेगा । 
मोदी पार्ट-1 की शुरुआत में ये सोना तो काला है...! सोने पर ड्यटी घटाकर दस से चार फीसदी की गयी थी। मगर एक्साइज ड्यूटी डाल दी गई, उस ड्यूटी को कम कराने के लिए देश भर के कारोबारियों ने 40 दिन तक दुकानें बंद करके आंदोलन किया था। धरना प्रदर्शन के साथ ही ट्रेनें भी रोकी गयी थीं। व्यापारियों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया था। 
 मोदी- 2 के आते ही इस साल के बजट में सरकार ने फिर आयात ड्यूटी बढ़ा दी है। आल इंडिया बुलियन फैडरेशन के प्रेसिडेंट अजय कुमार गर्ग का साफ कहना है कि सरकार जब तक ड्यूटी को जायज स्तर तक नहीं लायेगी, तस्करी पर अंकुश संभव नहीं है। श्री सर्राफा कमेटी के अध्यक्ष मुरारीलाल फतेहपुरिया जोकिइस्तीफा दे चुके हैं पर मंजूर नहीं किया गया है, महामंत्री राकेश मोहन रांकाजी का कहना है कि ड्यूटी घटाये बगैर तस्करी पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता। आगरा सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष नितेश अग्रवाल, महामंत्री अशोक अग्रवाल का कहना है कि उत्तर प्रदेश सर्राफा एसोसिएशन के बैनर तले एक बार फिर आंदोलन की शुरुआत हो चुकी है। सर्राफा मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन दौनेरिया, महामंत्री ब्रजमोहन रैपुरिया




 कहते हैं कि सरकार की मनमानी के चलते लाखों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। सर्राफा स्वर्णकार व्यवसाय समिति के अध्यक्ष सुनील वर्मा, महामंत्री राजू मेहरा ने कहा कि बाजार की इससे अधिक दुर्गति कभी नहीं हुई ।
दरअसल में सरकार को अपनी विदेशी करंसी बचाने हेतु और कैड़ की नुकसानी से बचने के लिए आयाती सोना महंगा कर दिया हैं ताकि भारत में सोने की आयात पर अंकुश बना रहे ।
(साभार अजय गुप्ता ) 


• रिपोर्ट स्पर्श देसाई √• Gold Dust News Channel• के लिए...

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