*भारत भविष्य में प्रयोगशाला में विकसित हीरे के लिए सबसे बड़ा बाजार क्यों बन सकता है?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*भारत भविष्य में प्रयोगशाला में विकसित हीरे के लिए सबसे बड़ा बाजार क्यों बन सकता है?*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
【मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई】भारत दुनिया में सहस्राब्दियों की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है,जिसे भविष्य में प्रयोगशाला में विकसित हीरों का सबसे बड़ा बाजार माना जाएगा ।ऐसा एक रिपोर्ट में कहा गया है । उस रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कैसे प्रयोगशाला में विकसित हीरे प्राकृतिक हीरे की छाया से उभरे हैं? और खुद को रत्न और आभूषण उद्योग में एक बढ़ते पदचिह्न के रूप में स्थापित किया है? जबकि वैश्विक हीरा उद्योग हाल ही में हेडविंड का सामना कर रहा है।
*भारत और प्रयोगशाला में तैयार की गए हीरे*
भारत सरकार ने स्वचालित मार्ग के तहत इस क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी है। बजट 2019-20 में GST दर को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया था। वर्ष 2019 विशेष रूप से प्रयोगशाला में विकसित हीरों का वर्ष था।
*अकेले भारत ने $44.3 करोड़ मूल्य के हीरेविकसित किए गए*
प्रयोगशाला में विकसित किए गए हीरों के निर्यात में तेज वृद्धि देखी गई हैं । जो साल-दर-साल 102 प्रतिशत बढ़ा था। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 की शुरुआत में भी भारत में प्रयोगशाला में विकसित हीरे का निर्यात साल-दर-साल 60 फीसदी बढ़ा था । जबकि प्राकृतिक हीरे के निर्यात में साल-दर-साल 41 फीसदी की गिरावट आई थी। उद्योग के विशेषज्ञों ने कहा कि लगभग पांच साल पहले मुट्ठी भर प्रयोगशाला हीरा उत्पादक था लेकिन अब रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक हीरा उद्योग में मंदी के कारण पिछले 2-3 वर्षों में उनकी संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है। इसका मतलब लैब डायमंड और माइनेड डायमंड कंपनियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा है।
*प्रयोगशाला में विकसित हीरा क्या है?*
सीधे शब्दों में कहें तो लैब में विकसित हीरा मशीन के तहत लैब में विकसित किया जाता है । जबकि प्राकृतिक हीरा पृथ्वी के अंदर से खोदकर निकाला जाता है। लैब-निर्मित हीरे को माइक्रोवेव कक्ष में रखे कार्बन बीज से विकसित किया जाता है और एक चमकदार प्लाज्मा बॉल में सुपरहिट किया जाता है। प्रक्रिया ऐसे कण बनाती है, जो हफ्तों में हीरे में क्रिस्टलीकृत हो जाते हैं। यह तकनीक-आधारित विनिर्माण खनन हीरे की श्रृंखला की पूंजी और श्रम-गहन कारकों में सीधे कटौती करता है और इसलिए प्रयोगशाला में विकसित हीरे की कीमत 100 प्रतिशत हीरा होने के बावजूद खनन की तुलना में 30-40 प्रतिशत सस्ता है। प्रयोगशाला में विकसित हीरे दो प्रकार के होते हैं । जिसमें एक सीवीडी। हैं और दूसरा एचपीएचटी हैं । भारत विशेष रूप से रासायनिक बाष्प अपघटन (सीवीडी) तकनीक में माहिर और अग्रणी है । जो कि सबसे शुद्ध प्रकार के हीरे के रूप में प्रमाणित है। रिपोर्ट के अनुसार "जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका" ने भविष्यवाणी की है कि प्रयोगशाला हीरों की कुल वार्षिक बिक्री निकट भविष्य में आज के लगभग 20 बिलियन डॉलर से 100 बिलियन डॉलर से अधिक होगी। हीरे का यह खंड 15-20 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है।
*गुजरात का सूरत-असली और सीवीडी हीरों की राजधानी*
दुनिया के 10 में से नौ असली हीरे सूरत में पॉलिश किए जाने का अनुमान है। यद्यपि दुनिया अभी भी प्रयोगशाला में विकसित हीरों के प्रति जागृत हो रही है लेकिन पॉलिशिंग के मामले में सूरत ने पिछले 2-3 वर्षों में तेजी से प्रगति की है। वर्तमान में सूरत में 25-30 प्रतिशत डायमंड पॉलिशिंग इकाइयां प्रयोगशाला में हीरों को तराशने का काम करती हैं । जिनमें से 15 प्रतिशत इकाइयां केवल लैब-निर्मित कमोडिटी में काम करती हैं। दिनेश नवादिया, गुजरात के क्षेत्रीय अध्यक्ष जीजेईपीसी के अनुसार सूरत में 7,000-8,000 डायमंड पॉलिशिंग इकाइयों में वर्ष 2019 तक प्रयोगशाला में विकसित डायमंड पॉलिशिंग का हिस्सा एकल अंकों में हुआ करता था। अब वो कई गूना बढ़ गया है।【Photo Courtesy Google】
★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Gold Dust•News Channel•#सीवीडी हीरें

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