आखिर कार सोने के आभूषणों की हॉल मार्किंग हैं क्यां ?/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
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मुंबई / रिपोर्ट स्पर्श देसाई
क्या यह सोने की शुद्धता की गारंटी देता हैं, हॉल मार्किंग? नमूनाकरण के आधार पर की गई एक प्रक्रिया है । इस प्रकार कोई गारंटी नहीं है की वह आइटम जो हॉलमार्क किया गया है, जैसा कि चिह्नित है वैसी उसकी शुद्धता हो।
हॉलमार्किंग प्रस्तावित कानून को समझे तो आभूषण बेचने के लिए आभूषण के निर्माण और बिक्री के लिए बीआईएस से लाइसेंस प्राप्त करना होता हैं ।
विक्रेता, सभी स्टाफ सदस्यों के साथ सोने के आभूषण के किसी भी अंडर-कैरेट के लिए आभूषण बेचने वाला जिम्मेदार हैं, साथ ही आपराधिक मुकदमा भी दायर होता हैं ।
विक्रेता को गहनों के विस्तृत रिकॉर्ड को बनाए रखना पड़ेगा जिसे हॉलमार्क किया गया है।
14 kt, 18 kt और 22 kt के सोने के आभूषण केवल बेचे जा सकते हैं। सोने के आभूषणों की कोई अन्य शुद्धता को बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी । भले ही ग्राहक जो अन्य शुद्धता चाहे ।
अनिवार्य हॉलमार्किंग को लागू किया जाना है और पुराने स्टॉक को साफ करने के लिए उद्योग को एक वर्ष तक का समय दिया गया है।
उद्योग के लिए समस्याएँ क्यां हैं? वो देखे तो व्यवसाय करने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता ज्वैलर्सो को गोल्ड कंट्रोल एक्ट और ‘लाइसेंस राज’ के दिनों में वापस ले जाएगी।
अभी तक केवल 26000 ज्वेलर्स ने लाइसेंस लिया है 1 वर्ष का वक़्त दिया जाएगा उसमें अगर 26,000 और लोग लाइसेंस ले लेंगे तो भी बाकी 64 लाख 50 हजार लोगों की इंडस्ट्री को एकदम से कारोबार करने की इजाजत छीन लेना गलत और अदूरदर्शिता भरा निर्णय होगा ।
हॉलमार्किंग केंद्र अपनी हॉलमार्किंग गतिविधि के हिसाब खाता रखता है। जौहरी से यह उम्मीद की जाती है कि वे खाते बनाएंगे और इंस्पेक्टर के मांगने पर दिखाएंगे । सभी दुकानदार अपने स्टाफ का हिसाब रखते हैं । गोल्ड कंट्रोल एक्ट में भी केबल स्टॉक के वजन रखने के लिए खाते बनाए जाते थे । पीस गिनती के नहीं, यहां पीस गिनती का वर्णन भी लिखना पड़ेगा । अलग अलग आभूषणों के किस्मों का वर्णन भी रखना पड़ेगा ।
अलग-अलग शुद्धता का खाता भी रखना पड़ेगा ।और अलग-अलग हाल मार्क सेंटर से आया हुआ माल का अलग खाता भी रखना पड़ेगा ।
सिर्फ 14 कैरेट 18 कैरेट और 22 कैरेट के गहने बेचने की अनुमति होगी । जबकि ग्राहक की मांग के अनुसार शुद्धता के गहने बेचने की अनुमति मिलनी चाहिए । विशेषकर 20 कैरेट शुद्धता के गहने बहुत ज्यादा प्रचलित है उनके बिकने से ग्राहक और देश को लाभ है ।
भारत में पर्याप्त हॉलमार्किंग केंद्र नहीं हैं, इसलिए आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकसित होने तक अनिवार्य हॉलमार्किंग का प्रस्ताव व्यावहारिक नहीं है। समाधान क्यां हैं इन सब सवालों का ? NITI Aayog ने "ट्रांसफॉर्मिंग इंडियाज़ गोल्ड मार्केट" शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी । जिसमें उसने BIS अधिनियम का मूल्यांकन किया है और कई बदलावों की सिफारिश की है ताकि हॉलमार्किंग यूनाइटेड किंगडम में लागू हॉलमार्किंग की प्रक्रिया के अनुरूप हो। वो सिफारिशें कयां हैं ? जब हाल मार्किंग अनिवार्य है तो हॉलमार्क वाले सोने के आभूषणों के निर्माण या बिक्री के लिए किसी भी लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
किसी भी अंडर-कैरेट के लिए हॉलमार्किंग केंद्र को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
विक्रेता को हॉलमार्क वाली वस्तुओं के खातों को बनाए रखने की कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
देश में बिक्री के लिए सोने के आभूषणों की सभी शुद्धता की अनुमति होनी चाहिए। विशेषकर 20 कैरेट की भी । अनिवार्य आधारभूत संरचना स्थापित होने के बाद अनिवार्य हॉलमार्किंग को बीआईएस द्वारा लागू किया जाना चाहिए।
हॉलमार्किंग को व्यापार में सहायता और वृद्धि करनी चाहिए, न कि कारोबार को कंट्रोल करने की कवायद में छोटे कारोबारियों को कारोबार से भगा कर केवल कारपोरेट का इस कारोबार पर अधिपत्य स्थापित
करना । ज्वैलर्सो जोर देना चाहिए कि हम हॉलमार्किंग का स्वागत करते हैं, लेकिन केवल NITI Aayog द्वारा प्रकाशित वैटल कमेटी गोल्ड रिपोर्ट की सिफारिशों के कार्यान्वत होने के बाद।
◆रिपोर्ट स्पर्श देसाई √●Gold Dust News Channel # Gdnc ● के लिए...

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