ज्वेलर्स को परेशान करना यह इज ऑफ डूइंग बिजनेस सिद्धांत का सरासर उल्लघंन हैं / रिपोर्ट स्पर्श देसाई




              मुंबई /  रिपोर्ट स्पर्श देसाई

सभी स्वर्णकार ज्वेलर्स भाइयों को दिल्ली के इंडिया ज्वेलर्स फोरम बोर्ड़ ने अनुरोध किया है कि इस विषय को बहुत गंभीरता से लें, देश के अंदर ज्वेलर्स स्वर्णकार द्वारा ना केवल सोना बल्कि ज्वेलरी कि मूवमेंट को रोककर परेशानी खड़ी की जा रही है । यह इज ऑफ डूइंग बिजनेस सिद्धांत का सरासर उल्लघंन हैं  ।

जीएसटी का उद्देश्य इज ऑफ डूइंग बिजनेस था ।जीएसटी में यह निर्धारित कर दिया गया था की ज्वेलरी और कीमती धातुओं की मूवमेंट या डिलीवरी चालान और या इनवॉइस के साथ वैद्य है । ई वे बिल स्वर्ण और ज्वेलरी इत्यादि मूवमेंट पर लागू नहीं है  । जब पूरे देश के अंदर सड़कों पर हर किसम के माल की आवाजाही अगर वैद्य डॉक्यूमेंट साथ हो रही है ,तो उसे कहीं भी रोके जाने की मनाही है । चेक पोस्ट से भी हटा दी गई है । ऐसी स्थिति में केवल ज्वेलर्स गुड्स को वैध डॉक्यूमेंट होने के बावजूद वेरिफिकेशन के लिए रोकना सरासर अन्याय है । ना केवल पुलिस और कस्टम बल्कि इनकम टैक्स की तरफ से भी मूवमेंट के दौरान ज्वेलरी या सोना हीरा इत्यादि मिलने पर चाहे वह वह डाक्यूमेंट्स के साथ हो ज्वेलरी इंडस्ट्री को बहुत परेशानी झेलनी पड़ रही हैं । इसका संज्ञान लेना बहुत आवश्यक हैं ।

सन 1962 में कस्टम बिल के विरोध के चलते पार्लियामेंट के अंदर एक सिलेक्टिव कमेटी ऑन कस्टम बिल 1962 बनाई गई थी ।  जिसकी अध्यक्षता मोरारजी देसाई ने की थी । इस सिलेक्टिव कमेटी के समक्ष देशभर की मुख्य एसोसिएशन बतौर गवाह पेश हुई थी और इस तरह की परेशानियों के खिलाफ जबरदस्त विरोध जताया गया था । ऐसा इंडिया ज्वेलर्स फोरम आईजेएफ बोर्ड  दिल्ली ने  हाल के दिनों में बताया था ।

●रिपोर्ट स्पर्श देसाई √● Gold Dust News Channel● के लिए ...

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